हरियाणा का प्राचीन भीमा देवी मंदिर कहां हैं, एवं इस मंदिर की विशेषता जानें?

भारत प्रसिद्ध है पूरे विश्व में उसका सबसे बड़ा श्रेय जाता है भारत की प्राचीनता को। भारत सबसे पुराने देशों में से एक हैं। यह सब तो आप जानते ही हैं किन्तु, आज के लेख में हम आपको एक विशेष एवं बेहद खूबसूरत मंदिर के बारे में बताएंगे जिसकी जानकारी प्राप्त करने के बाद आप उस मंदिर का नाम अवश्य ही  Bookmark करेंगे। 

हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित पिंजौर में स्तिथ प्राचीन भीमा देवी मंदिर के कुछ Highlights!

  • महाभारत काल से है संबंध। 
  • लगभग १०० मूर्तियां हैं। 
  • उत्तर भारत के खजुराओ नाम से भी है मशहूर। 

आखिर क्या है इतिहास?

कहा जाता हैं कि प्राचीन भीमा देवी मंदिर में माँ दुर्गा की ही एक स्वरूप बिराजमान है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि हिमाचल प्रदेश के पश्चिमी हिमाचल में भीमा देवी भीम रूपा स्वरूप में प्रकट हुए थी और ऋषि मुनियों को सुरक्षा प्रदान की थी। इसका निर्माण गुर्जर प्रति हार राजवंश के राजाओं द्वारा किया गया था। इस मंदिर के निर्माण का सर्वाधिक श्रेय संभवतः इस राजवंश के राजा राम देव को जाता है। यह भी सुनने में आया था कि इस मंदिर का सबंध उज्जैन से है ऐसा बताया जाता है। 

यह 8वीं शताब्दी का पौराणिक भीमा देवी मंदिर हैं। तभी तो इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से है। इतना ही नहीं बल्कि यह मंदिर 1974 में उस वक्त चला जब पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई की। खुदाई में मंदिर परिसर में लगभग 100 प्राचीन मूर्तियां मिली गई थी। 

माता की महानता!

वर्तमान में विद्यमान जागृत शक्तियों करें उन 5 में से एक है भीमा देवी। यह भी कथाओं के अनुसार पता चला है कि अज्ञात वास के दौरान पांडवों ने उस स्थान पर अपना कुछ समय गुजारा था। पिंजौर को मौलिक रूप से पंचपुरा कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ है पाँच की नगरी।  पांडव यहाँ काली की आराधना करते थे। १९ वीं. सदी में अलेक्जेंडर कन्निंघम ने १२ वीं. सदी के कुछ अभिलेखों को लेखांकित किया था जिसमें पंचपुरा का उल्लेख प्राप्त होता है। अल बरूनी ने भी अपने यात्रा संस्मरण में इस मंदिर का उल्लेख किया था।

17 वीं. सदी 

औरंगज़ेब की सेना ने १७ वीं. सदी में इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया। ऐसा प्रतीत किया गया है  कि यह मंदिर ना केवल भूगोल से विलुप्त हो गया अपितु जनता की स्मृति से भी लुप्त हो गया है। इस मंदिर ने कदाचित पूर्वकालीन इस्लामी आक्रमणों को भी सहन किया था। 2001 में यहां बनाया गया ताकि और भी मूर्तियां अच्छे से नज़र आए। 

अद्भुत नज़ारा भीमा देवी मंदिर का – 

यह मंदिर एक पंचायतन शैली का मंदिर है। इस शैली के मंदिर परिसर में 5 मंदिर हैं जो 5 देवताओं को समर्पित हैं। एक मंदिर बीच में और उसके आसपास के 4 कोने में बाकी के मंदिर। आसपास के कोने में स्थित 4 मंदिर काफी छोटे हैं बीच वाले मंदिर की तुलना में। जो नज़ारे को और भी खूबसूरत बनाता है।

कुंड की कहानी। 

माता के मंदिर के उस पार महादेव का प्राचीन मंदिर है जहां उस समय में पांडव निवास करते थे। जिसे भीमेश्वर मंदिर कहा जाता है। और उस मंदिर का निर्माण भीम ने किया था। 

मंदिर के समीप एक जलकुंड है। ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र में कुल ३६५ जलकुंड थे। यह कुंड उनमें से ही एक है। मंदिर का जलकुंड छोटा सा है किंतु इसका जल अत्यंत स्वच्छ था। इसके जल में अनेक रंगबिरंगी मछलियाँ होती है। यह कुंड मंदिर परिसर का सर्वाधिक जीवंत भाग था।

प्रतिमाएं 

मंदिर परिसर क्षेत्र के उत्खनन के समय प्राप्त हुई अनेक प्रतिमाएं परिसर में चारों ओर बिखरी हुई हैं। उनमें से सर्वोत्तम प्रतिमाएं क्षेत्र संग्रहालय के चार कक्षों में सुरक्षित रखी हुई होती है।